holi 2021| 2022 में क्या है खास जाने पुरी जानकारी

holi 2021| 2022 में क्या है खास जाने पुरी जानकारी – भारत की संस्कृति के बारे में जानने के लिए बहुत से लोग बेताब रहते हैं। कि कब से कौन त्योहार आनेवाला है। हमारे भारतीय संस्कृति में कुछ ऐसा त्योहार है।

जिसे बहुत ही लोगों द्वारा पसंद किया जाता हैं। जिसका नाम है होली। इसी के बारे में आज बात करेंगे कि होली का इतिहास क्या है।

Holi 2021| 2022 क्या है?

होली भारतीय संस्कृति का एक समाजिक कार्यक्रम है। जो आज से ही नहीं बल्कि कई बर्षो से मनाया जाता हैं। जिसे होली उत्सव कार्यक्रम या होली के नाम से जानते हैं।

Holi क्यों मनाते हैं।

होली मनाने के पीछे एक बहुत ही बड़ा रहस्य छुपी हुई है। जिसे कई लोग जानते भी हैं और कई

लोग नहीं भी जानते हैं। होली को आखिरकार लोगों द्वारा कैसे मनाया जाने लगा। इसके पीछे का कारण है।

हिरण्यकश्यप और उसके पुत्र प्रहलाद उसकी पत्नी होलिका इन तीनों से होली की शुरुआत होती हैं। जब हिरण्यकश्यप

को अपने आप पर घमंड हो जाता हैं। तो वह खुद को भगवान मानने लगता है। अपने आसपास के सभी

नौकर चाकर को बस में करके अपने आप को भगवान की तरह पूजवाता था। पर उसके बेटे को यह मंजूर ना थी।

वह जानता था, कि यह गलत हो रहा है। पर वे अपने कर्मों से कभी पीछे न हटा।

वह हमेशा भगवान की ही चर्चा और पूजा करता था।

पर इस काम को देखकर हिरण्यकश्यप कोध्रित हो जाता है। और उसे मार डालने की धमकी देता हैं।

इसी तरह कई दिन और महीने बीत जाते हैं। दोनों में झगड़ते-झगड़ते

पर एक दिन हिरण्यकश्यप इतना कोर्धित हो जाता है, कि वह प्रहलाद को मारने के लिए तैयार हो जाता है।

पर उसको बचाने के लिए उसकी माता होलिका आ जाती हैं।

होलिका के पास एक ऐसी चादर थी, जो अग्नि के प्रभाव को पुरी तरह से विलुप्त कर देती थी। जिससे किसी भी प्रकार का कोई असर शरीर पर पर नहीं पड़ता था।

हिरण्यकश्यप प्रहलाद को मारने के लिए अग्नि को ही तैयार किया था। क्योंकि वह देखना चाहता था, कि भगवान होते हैं या नहीं।

जब वह प्रहलाद को अग्नि में धकेलता है। तब उसकी माता उसे अपने चादर से ओढ़ाकर अग्नि में कूद जाती हैं।

जिससे प्रहलाद तो बच जाता हैं। पर उसकी माता उस अग्नि के लपेटे में जलकर भस्म हो जाती हैं।

इसी को देखते हुए लोगों द्वारा एक अनुभव का अनुमान हुआ कि क्यों न इसे होलिका के रूप में प्रदर्शित किया जाए जिसे होलिका या होली मनाया जाने लगा।

होली का असर या प्रभाव क्या होता हैं

Holi एक बहुत ही आनंदमय और रंगीन त्योहार होता है। जिसमें किसी को भी उच्च निच्च के नजर से नहीं

देखा जाता हैं। इस दिन सभी लोग एक-दूसरे के गले मिलते जुलते हैं। ताकि आनेवाले समय में भाईचारा बने

रहे। होली ही एक ऐसा त्योहार है। जो पूरी दुनिया में लोगों द्वारा जंग किए गए या किसी से झगड़ा

किए गये। ये सभी को होली के दिन एक दूसरे से गले मिलाता हैं।

इस दिन सभी लोग एक-दूसरे के गले मिलकर खुशी और आनंद का अनुभव करते हैं। ये उनकी परम्परा के

अधिन हैं। इसमें हिन्दू मुस्लिम, शिख, ईसाई ये सभी या अन्य किसी भी धर्मों के लोगों द्वारा होली का उत्सव

बड़ा ही खुशी और आनंदमय के साथ किया जाता हैं।

होली कब से मनाया जाने लगा

जब-जब नया साल की शुरुआत होती हैं। तब बहुत से लोगों के मन में अपने भारत की संस्कृति और अच्छी त्योहारों

को जानने के लिए एक भावना जागरूक होती हैं। कि होली कब से है। जैसे-जैसे पुराने साल बितते हैं

और नये शाल की शुरुआत होती हैं। तो पिछले वर्षों के अनुसार Holi को देखते हुए उसी के आधार पर

एक निश्चित रूप से कैलेंडर निकाली जाती हैं। की आनेवाले नए वर्ष में होली कब से मनाई जाएगी। इसमें एक

निश्चित दीन निर्धारित की जाती हैं। कि आपको होली इसी दिन को ही मनाना है।

अलग-अलग वर्षों का कैलेंडर और त्योहार अलग-अलग दिन के होते हैं। पर होली एक ऐसा त्योहार है।

जिसे मार्च के महीने में ही मनाया जाता हैं। जिसको बुढ़े या पुरनीये द्वारा इस महीने को फाल्गुन का महीने

कहां जाता हैं। होली को अक्सर आनेवाले नये वर्ष के अनुसार दिन और महीना निर्धारित किया जाता हैं।

होली के पकवान

इस दीन को बहुत ही शुभ माना जाता हैं। जिसके लिए सभी घरों में होली के शुभ अवसर पर पकवान

का आरंभ किया जाता हैं। जिसमें सभी भाई बहन मिलकर एक दुसरे के साथ मिलकर आपस में बांटकर भोजन का

आनंद उठाते हैं। जिससे माहौल और ही आनंदमय बन जाता हैं। इस दिन लगभग खानें के योग्य पकवान पकाय जातें

हैं। जैसे कि पुआ, पुड़ी, गुरगुजीया, लिट्टी इत्यादि। बहुत सारे पकवान पकाये जातें हैं।

होली के दिन नये कपड़े पहने या नहीं।

होली के दिन नये कपड़े जरुर पहनना चाहिए। क्योंकि होली साल भर में तो एक बार ही आता है। जिससे

बड़ा ही रोमांचक और बेहतरीन माना जाता हैं। जिससे नये कपड़ों का अवश्य धारण करना चाहिए।

होली खत्म होने के बाद 10:00 बजे से 6:00 बजे तक

10:00 बजे से 6:00 बजे तक रंगों के उत्सव में लोग लीन रहते हैं। और जब टाइम खत्म हो जाता

है। तो रंगों का लगाना लोग बंद कर देते हैं। उसके बाद सभी लोग नहा धोकर नये-नये कपड़े पहनते

हैं। और सभी बड़े बुजुर्ग के आशीर्वाद लेने के लिए अवीर द्वारा पैर को चुम्बते हैं। फिर ये कार्य पुरा

हो जाने के बाद रात में अलग से भोजन और प्रोग्राम/नृत्य का आनंद लेने के लिए नृत्य किया जाता

हैं। जिससे सभी लोग भारी से भारी संख्या में जूटकर नृत्य का आनंद उठाते हैं।

और होली के मग्न में लीन रहते हैं।

होली कौन-कौन माना सकता हैं

इस त्योहार को मनाने के लिए किसी भी धर्म पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। सभी धर्मों के लोग इस

खास त्योहार को अपने मन मुताबिक मना सकते हैं। होली को खासकर India से बाहर देशों में भी बहुत ही

धुम-धाम से मनाया जाता हैं।

आनेवाले समय में होली का महत्व क्या रहेगा

इस विषय पर चर्चा करना एक तरह से सही भी हो सकता हैं। और एक तरह से गलत भी। क्योंकि

आनेवाले समय में लोगों पर डिपेंड करेगा। कि किस तरह से अपने संस्कृति और सभ्यता को देखते हैं। जिस प्रकार

वे अपने संस्कृति और सभ्यता को देखते हैं। उसी तरह होली का माहौल रहेगा। आनेवाले समय के लिए होली के

बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता हैं। कि कैसा होली का माहौल रहेगा। अगर लोगों में इसके अपेकक्षा

उमंग और उत्सुक रहता हैं। तो जरूर होली पहले की तरह देखने को मिल सकता हैं। क्योंकि अब लोग

धीरे-धीरे पश्चिमी सभ्यता की ओर जाने लगें हैं। जिससे उन्हें फैशन ज्यादा पसंद हैं। ना की अपनी संस्कृति।

क्या होगा जब पुरी तरह से लोग अपनी होली संस्कृति को भुल जाएंगे

ऐसा लगता है, कि मैं किसी अविश्वसनीय लेख पर बात कर रहा हूं। पर यह मूल रूप से सही नहीं है। हमारे समाज में कई लोगों को अपने संस्कृति और त्योहारों को छोड़कर दुसरे सभ्यता में जाते हुए देखा जा रहा हैं।

वो हैं पश्चिमी सभ्यता। जैसे-जैसे समय गुजर रहा है। वैसे-वैसे लोग अपने संस्कृति को भुलते जा रहें हैं। उनमें से एक होली जो भारतवर्ष में एक महान त्योहार है।

जब पुरी तरह से लोगों द्वारा संस्कृति और सभ्यता को भुल जाएंगे तब ऐसा प्रतित होगा कि भारत वर्ष अब भारत नहीं रह गया यह कोई दूसरा देश बन गया।

क्योंकि यहां की सारी सहनाईया लोगों द्वारा कई वर्षों से मनाए जाने वाले अपने प्यारे त्योहार अगर नहीं रहे तो भारत एक सुना साना देश हो जाएगा।

जहा पर लोग अपने काम से काम रखेंगे।

holi 2021| 2022 की स्थिति

इस समय लोग रंग लगवाने से कतराते हैं। क्योंकि वो पूरी तरह से अपने सभ्यता को भुल रहें हैं। क्योंकि उन्हें अपने संस्कृति से प्यार नहीं है। उन्हें सिर्फ फैशन चाहिए ना कि किसी तरह का रंगों का त्योहार।

जब किसी व्यक्ति में रंग लगाया जाता है। तो पहले की अपेक्षा अब कहीं-कहीं पर झगड़ा भी हो जाता हैं। जिससे माहौल और ही खराब हो जाता हैं।

इसलिए अब के समय में रंग उसी को लगाए जो रंग लगवाने के लिए इक्छूक हो वरना बिना पुछे हुए लगाते हैं, तो कुछ भी हो सकता हैं। आपके साथ इसलिए सतर्क रहें।

holi 2021| 2022 के कुछ गाने और जोक्स

(i) ये तो होली बड़ा ही खुशनसीब है। जो साल भर में आती है। लेकिन सबमें एक दुसरे के साथ भाईचारा का माहौल बना के जाती हैं।

(ii) ये रंगों का त्योहार होली। मैं जीतना तेरी तारीफ करू उतना कम ही है। क्योंकि दुश्मन को भी गले मिलाकर जाती हैं। तू।

(iii) होली का त्योहार है ये इसे ना समझो छोटा। ये तो बड़ा ही खुशनसीब हैं जो सबको हैं भाता।

(iv) रंगो में मैं तेरे लिपट जाऊ ना ही कोई ग़म सताए। बस याद आए तो बस तू ही आये।

(v) क्या करूंगा अगर तू ना रहे। मैं तो तेरे रंगों से खेलता हूं। पर अगर तू ही ना रहे तो मैं क्या करूंगा।

(vi) होली को ना भूलों ये मेरे दोस्तों, ये तो बड़ा ही खुशनसीब हैं। जो एक दुसरे को खुशियों से भर के हैं जाता।

Conclusion – इस पोस्ट में हमने जाना कि होली क्या है? Holi क्यों मनाते हैं? होली का असर या प्रभाव क्या होता है? होली कब से मनाया जाने लगा।

तो आशा करता हूं कि यह पोस्ट holi 2021| 2022 में क्या है खास जाने पुरी जानकारी आपको पसंद आया होगा। धन्यवाद।

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